
शहर के एकमात्र पार्क की हालत दयनीय
जिम्मेदारों को पार्क की दुर्दशा से कोई सरोकार नही
शेखर कौशल देवास । शहर का एकमात्र पार्क मल्हार स्मृति उद्यान इन दोनों अय्याशी का अड्डा बनता जा रहा है। यहां पर आए दिन असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है । जिनकी मौजूदगी से पार्क में आये दिन नए कारनामे होते रहते हैं।

गौरतलब रहे की मल्हार स्मृति पार्क शहर का एकमात्र ऐसा पार्क है जहां पर लोग अपने बच्चों एव परिवार को लेकर सुकून की तलाश में यहां आते हैं । वहीं दूसरी ओर यहां पर आपको आए दिन प्रेमी युगल खुलेआम अय्याशी करते नजर आएंगे। कई बार अश्लीलता की हदे पार कर चुके वीडियो एवं फोटो वायरल हो चुके हैं जिसमे साफ तौर पर दिखाई देता है कि मल्हार स्मृति पार्क में किस कदर अय्याशी का खुला खेल खुलेआम चल रहा है। लेकिन इसके बाद भी इस पार्क के जिम्मेदार इस और सुध लेने को राजी नहीं है। छुट्टी वाले दिन पार्क में बच्चों एवं परिवारों की काफी भीड़ रहती है। ऐसे मौके पर असामाजिक तत्व भी यहां पर काफी बड़ी तादाद में आते हैं। ओर यही लोग पार्क में कई बार महिलाओ एवं लड़कियों के साथ छेड़खानी की घटना को अंजाम भी देते हैं। पूर्व में भी छेड़खानी को लेकर पार्क में चाकू बाजी की घटना घट चुकी है । लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार इस ओर देखने को राजी नही है। जैसे जैसे शाम बढ़ती जाती है वैसे ही पार्क में आवारा तत्वों की संख्या भी बढ़ती जाती है कहने को ओर रजिस्टर में तो पार्क में देखरेख एवं सुरक्षा के लिए काफी संख्या में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन कोई अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार नहीं है । जिसका जैसा मन करे वो पार्क में करने की खुली आजादी है।

पार्क में प्रेमी जोड़ खुलेआम चुंबन करते दिखाई देना कोई आम बात नही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि स्कूल टाइम में कई नाबालिग लडकिया यहाँ पर संदिग्ध हालत में देखी जा सकती है। लेकिन इसके बाद भी उनको रोकने टोंकने वाला कोई नही है। कई बार तो प्रेमी जोड़ो द्वारा अश्लीलता की हदें पार कर दी जाती है। जिसके चलते पार्क में मौजूद अन्य लोग शर्मिंदगी महसूस करते है। सबकुछ देखने के बाद भी इनको कोई रोकने वाला नही है। यदि परिवार के साथ लोग यहां पर सुकून की तलाश में आते हैं तो ऐसे दृश्य देखकर परिवार जनों के साथ लोगों को शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ती है। पार्क में कई बार महिलाएं भी खुलेआम अनैतिक कार्य करते देखी जा सकती है। अनैतिक कार्यो में लिप्त महिलाओं ने तो पार्क को अपना आफिस बना रखा है। वे सारे कामकाज यही से संचालित करती है। पार्क में बच्चों के खेलने के झूले एवं फिसल पट्टी भी दुर्दशा का शिकार होती जा रही है क्योंकि इनकी देखरेख करने वाला यहां कोई नहीं है यदि जल्द ही मल्हार स्मृति पार्क की दुर्दशा पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह पार्क असामाजिक तत्वों एवं अय्याशी करने वालों का शहर में प्रमुख अड्डा बन जाएगा और यहां परिवार वाले लोग अपने बच्चों और महिलाओं को लाने से भी डरने लगेंगे।




